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"एक कागज़... और पूरे घर की नींद उड़ गई। 65 साल की सुमित्रा देवी के घर जब अचानक 'कोर्ट का समन' (Court Summons) पहुंचता है, तो घर में खौफ और मोहल्ले में अफवाहों का माहौल बन जाता है। क्या समन का मतलब सच में कोई अपराध या गिरफ्तारी है? या यह न्याय व्यवस्था का महज़ एक बुलावा है? पढ़िए एक मध्यमवर्गीय परिवार की यह इमोशनल लीगल थ्रिलर कहानी, जो अदालत से जुड़े आपके हर डर को दूर करेगी और बताएगी कि समन आने पर आपका सबसे पहला कदम क्या होना चाहिए।"
"मैंने नॉमिनी बना दिया है, अब सब ठीक रहेगा..." एक पिता का यह भ्रम उसके जाने के बाद पूरे परिवार को कोर्टरूम के कटघरे में ले आता है। क्या बैंक अकाउंट का नॉमिनी ही पैसों का असली मालिक होता है? पढ़िए एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की कलम से निकला यह इमोशनल लीगल थ्रिलर, जो नॉमिनी, लीगल हेयर (कानूनी वारिस) और वसीयत (Will) का ऐसा सच उजागर करता है, जिसे जानना हर परिवार के लिए बेहद ज़रूरी है। कहीं एक कागज़ पर लिखा नाम आपके परिवार को तो नहीं बिखेर देगा?
एक रिटायर्ड जज की डायरी से: जानिए कैसे एक साधारण से मिडिल-क्लास अकाउंटेंट की ज़िंदगी उसके दोस्त द्वारा कराए गए एक 'फॉर्मेलिटी' वाले सिग्नेचर की वजह से बर्बाद हो गई। बिना पढ़े साइन करने, ब्लैंक चेक देने और गारंटर बनने का खौफनाक सच जो आपको अंदर तक डरा देगा।