Ek Kursi... Jo 30 Saal Tak Khali Rahi
हर त्योहार, हर खुशी में एक जगह खाली रही। तीन दशकों तक आम के पेड़ के नीचे रखी एक पुरानी, घिसी-पिटी लकड़ी की कुर्सी। यह सिर्फ फर्नीचर नहीं थी, यह एक याद थी, एक अनसुलझा सवाल। "एक कुर्सी... जो 30 साल तक खाली रही" एक लापता बुजुर्ग और एक परिवार के खामोश इंतज़ार की कहानी है, जब तक कि एक पुराना खत घावों को कुरेदकर और इतिहास को फिर से नहीं लिख देता।
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