Ek Kursi... Jo 30 Saal Tak Khali Rahi
हर शाम एक बुज़ुर्ग अपनी लकड़ी की कुर्सी पर बैठकर पूरे परिवार को मुस्कुराते हुए देखा करते थे। फिर एक दिन वे बिना कुछ कहे घर से निकल गए... और कभी लौटकर नहीं आए। तीस वर्षों तक वह कुर्सी खाली रही, लेकिन उम्मीद ज़िंदा रही। फिर एक पुराना लिफ़ाफ़ा मिला, जिसने परिवार को सिखाया कि सबसे गहरे ज़ख्म चुप्पी से बनते हैं और सबसे बड़ी विरासत संवाद, भरोसा और माफ़ी होती है। यह केवल एक कहानी नहीं, बल्कि हर परिवार के लिए रिश्तों, संवेदनाओं और Missing Person Awareness का एक भावनात्मक संदेश है।
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