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आँखें हमेशा पूरा सच नहीं दिखातीं... एक साइलेंट कैमरा भी धोखा दे सकता है।" एक रिटायर्ड टीचर के CCTV ने 'शांति विहार' कॉलोनी में एक क्राइम रिकॉर्ड किया, और पूरी कॉलोनी ने तुरंत एक आदमी को मुजरिम मान लिया। लेकिन जब हर चैप्टर नए फ्रेम और ब्लाइंड स्पॉट्स खोलता है, तो पता चलता है कि कैमरे ने झूठ नहीं बोला था... बल्कि लोगों ने उसकी अधूरी कहानी को ही पूरा सच मान लिया था। पढ़िए यह सस्पेंस से भरा साइकोलॉजिकल थ्रिलर, जो आपको अपने आस-पास की सच्चाई पर सोचने पर मजबूर कर देगा।
"क्या एक 30 सेकंड का वायरल वीडियो आपकी 20 साल की ईमानदारी को मिटा सकता है?" जानिए डॉ. अविनाश की कहानी, जिन्हें रातों-रात इंटरनेट की अदालत ने मुजरिम घोषित कर दिया। यह ब्लॉग सोशल मीडिया ट्रायल के पीछे की खौफनाक हकीकत, पुलिस जांच के महत्व, और कानून की नजर में 'FIR' और 'दोषी' के बीच के बड़े अंतर को उजागर करता है। क्या सच वाकई वायरल हुआ था, या सिर्फ एक झूठा आरोप? पूरा सच जानने के लिए पढ़ें।