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कटघरे में खड़े एक व्यक्ति ने अपने हर अपराध को 'मेरा मौलिक अधिकार' कहकर जायज़ ठहराने की कोशिश की। लेकिन जज के एक फैसले ने साबित कर दिया कि संविधान आपको अधिकार ज़रूर देता है, लेकिन कानून तोड़ने का लाइसेंस नहीं। जानिए आपके अधिकारों की 'लक्ष्मण रेखा' कहाँ खींची गई है।
क्या हमारे मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) सच में असीमित और अभेद्य हैं? आइए एक कोर्टरूम थ्रिलर के नजरिए से समझते हैं कि कैसे संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 राज्य के सख्त कानूनों के सामने अपनी सीमाएं तय करते हैं। जानिए वह कानूनी सच जो हर नागरिक को डराता भी है और जगाता भी है।