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बिहार पुलिस एवं बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस में सिपाही संवर्ग के लगभग 21,391 रिक्त पदों के लिए जारी भर्ती विज्ञापन में शैक्षणिक अर्हता और आयु सत्यापन के लिए निर्धारित 01.08.2022 की कट-ऑफ तिथि को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि शैक्षणिक सत्र 2022–23 में 12वीं उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी इस पूर्ववर्ती तिथि के कारण भर्ती से वंचित हो गए, जिससे सार्वजनिक रोजगार में समानता का अधिकार प्रभावित होता है। माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं माननीय न्यायमूर्ति पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने रिट याचिका (CWJC 11126/2023) की सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी कि भर्ती प्राधिकारी को पात्रता शर्तें और संदर्भ तिथि तय करने का पूर्ण प्रशासनिक अधिकार है। न्यायालय ने कट-ऑफ तिथि में कोई मनमानापन न पाते हुए याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया।
क्या किसी वैधानिक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए सार्वजनिक विज्ञापन अनिवार्य है? क्या किसी राजनेता का चयन स्वतः अवैध माना जा सकता है? पटना उच्च न्यायालय ने Civil Writ Jurisdiction Case No. 16611 of 2021 (Veterans Forum for Transparency v. State of Bihar) में बिहार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष पद पर प्रत्यर्थी संख्या 8 की नियुक्ति को चुनौती देने वाली अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) याचिका पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 16(3), चयन समिति की कार्यप्रणाली और सर्वोच्च न्यायालय के नमिता शर्मा व तेची तागी तारा फैसलों का विश्लेषण करते हुए जनहित याचिका को खारिज कर दिया। प्रशासनिक कानून और सार्वजनिक नियुक्तियों की विधिक बारीकियों को समझने के लिए पढ़ें यह संपूर्ण केस विश्लेषण।
क्या किसी व्यक्ति की जेंडर पहचान ही उसकी जाति हो सकती है? बिहार जाति आधारित गणना 2022 में ट्रांसजेंडर समुदाय को जातियों की सूची में क्रमांक 22 पर शामिल किए जाने के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में दायर CWJC No. 6505 of 2023 (रेशमा प्रसाद बनाम बिहार सरकार) पर न्यायालय का ऐतिहासिक दृष्टिकोण सामने आया। माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि "Transgender is not a caste identity"। न्यायालय ने आत्म-निर्णय के अधिकार और सरकारी स्पष्टीकरण (पत्र संख्या 7888) का संज्ञान लेते हुए सर्वेक्षण को रद्द किए बिना समुदाय के सामाजिक-आर्थिक कल्याण के संदर्भ में याचिका को महत्वपूर्ण टिप्पणियों के साथ निस्तारित किया। जानिए इस निर्णय के सभी संवैधानिक और कानूनी पहलू।