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एक अपराधी को लगा कि वह रात के अंधेरे में गुनाह करके बच निकलेगा, लेकिन डिजिटल फॉरेंसिक और कानून के हथौड़े ने उसका सारा गुरूर तोड़ दिया। पढ़िए एक रोंगटे खड़े कर देने वाली कोर्टरूम और इन्वेस्टिगेशन की कहानी, जो यह साबित करती है कि विज्ञान और न्याय की नज़रों से कोई नहीं बच सकता।
कटघरे में खड़े एक व्यक्ति ने अपने हर अपराध को 'मेरा मौलिक अधिकार' कहकर जायज़ ठहराने की कोशिश की। लेकिन जज के एक फैसले ने साबित कर दिया कि संविधान आपको अधिकार ज़रूर देता है, लेकिन कानून तोड़ने का लाइसेंस नहीं। जानिए आपके अधिकारों की 'लक्ष्मण रेखा' कहाँ खींची गई है।