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20 साल पुरानी एक धूल भरी फाइल, एक अनसुलझा केस और एक खामोश शहर। अदालत ने जिसे एक 'हादसा' मानकर फाइल बंद कर दी, क्या उसका सच कभी सामने आ पाएगा? पढ़िए एक ऐसा साइकोलॉजिकल थ्रिलर जो साबित करता है कि कभी-कभी मुजरिम कोई एक इंसान नहीं, बल्कि समाज का डर होता है।
एक बेगुनाह आदमी पर डकैती का झूठा इल्ज़ाम और उसके खिलाफ पुख्ता सबूत। जब पूरी दुनिया, गवाह और कानून उसके खिलाफ थे, तब एक बंद पड़ी फैक्ट्री के पुराने सीसीटीवी कैमरे ने कैसे बचाई उसकी जान? पढ़िए एक रोंगटे खड़े कर देने वाली कोर्टरूम सस्पेंस कहानी।