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क्या केवल मौखिक मृत्युपूर्व घोषणा (Oral Dying Declaration) के आधार पर किसी को हत्या का दोषी ठहराया जा सकता है? 09 अक्टूबर 2023 को Patna High Court की Division Bench ने Criminal Appeal Nos. 325, 456 & 481 of 2017 में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि कमजोर साक्ष्य, संदिग्ध गवाही और पुलिस की लचर जांच के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। इस लेख में जानें कि कैसे 800 गज दूर से आवाज सुनने के दावे और कपड़ों पर कट के निशान न होने के कारण कोर्ट ने अभियुक्तों को Benefit of Doubt देते हुए बरी कर दिया। यह क्रिमिनल लॉ और एविडेंस एक्ट को समझने के लिए एक मास्टरक्लास है।
एक सफल सॉफ्टवेयर इंजीनियर की अचानक मौत और एक खाली लैपटॉप। पुलिस के लिए यह एक साधारण हार्ट अटैक था, लेकिन क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन के नज़रिए से यह एक मर्डर था। जानिए कैसे मरने से पहले की गई सिर्फ एक गूगल सर्च ने एक बड़े क्राइम को बेनकाब कर दिया। क्या आपका डिजिटल फुटप्रिंट आपका सबसे बड़ा गवाह है?
एक शातिर कातिल जिसे लगा था कि उसने सबूतों का कोई नामोनिशान नहीं छोड़ा है। लेकिन वह भूल गया कि आज के डिजिटल युग में इंसान झूठ बोल सकता है, पर तकनीक नहीं। पढ़िए एक सस्पेंस से भरी कहानी, जहाँ CCTV और फॉरेंसिक साइंस ने एक 'परफेक्ट मर्डर' की गुत्थी सुलझा दी।
क्या एक मृत व्यक्ति की आवाज़ अदालत में गूँज सकती है? बिना चश्मदीद के कोई कातिल कैसे पकड़ा जाता है? इस कोर्टरूम इन्वेस्टिगेशन डॉक्यूमेंट्री में जानिए Indian Evidence Act (अब Bharatiya Sakshya Adhiniyam) के उन 10 ऐतिहासिक मुकदमों की कहानी, जिन्होंने भारत की अदालतों में सबूतों और सत्य की परिभाषा ही बदल दी।
किताबों की दुनिया से बाहर निकलिए और अदालत के कटघरे में चलिए! एक रिटायर्ड जज की जुबानी जानिए सुप्रीम कोर्ट के वो 10 ऐतिहासिक क्रिमिनल लॉ जजमेंट्स (Bachan Singh से Nirbhaya तक), जिन्होंने भारत के क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम की नींव हिला दी। यह ब्लॉग हर लॉ स्टूडेंट और जुडिशरी एस्पिरेंट के लिए किसी थ्रिलर से कम नहीं है।