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क्या किसी वैधानिक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए सार्वजनिक विज्ञापन अनिवार्य है? क्या किसी राजनेता का चयन स्वतः अवैध माना जा सकता है? पटना उच्च न्यायालय ने Civil Writ Jurisdiction Case No. 16611 of 2021 (Veterans Forum for Transparency v. State of Bihar) में बिहार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष पद पर प्रत्यर्थी संख्या 8 की नियुक्ति को चुनौती देने वाली अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) याचिका पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 16(3), चयन समिति की कार्यप्रणाली और सर्वोच्च न्यायालय के नमिता शर्मा व तेची तागी तारा फैसलों का विश्लेषण करते हुए जनहित याचिका को खारिज कर दिया। प्रशासनिक कानून और सार्वजनिक नियुक्तियों की विधिक बारीकियों को समझने के लिए पढ़ें यह संपूर्ण केस विश्लेषण।
"उसने कोई जुर्म नहीं किया था... फिर भी उसका नाम FIR में था।" सुबह के 6 बजे हैं। दरवाज़े पर पुलिस खड़ी है और एक बेगुनाह आदमी के खिलाफ एक गंभीर, लेकिन झूठी FIR दर्ज हो चुकी है। समाज की नज़रों में वो पल भर में मुज़रिम बन चुका है, जबकि अदालत का फैसला आना अभी बाकी है। क्या होगा जब एक आम और ईमानदार इंसान अचानक कानून के इस खौफनाक चक्रव्यूह में फँस जाएगा? क्या पुलिस उसे तुरंत गिरफ्तार कर लेगी? क्या यह झूठी FIR कभी कैंसिल हो पाएगी? पढ़िए एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की कलम से लिखी गई यह इमोशनल और सस्पेंस से भरी 'लीगल थ्रिलर' कहानी; जिसमें छिपा है हर उस बेगुनाह के लिए एक पूरा 'लीगल सर्वाइवल गाइड', जो कभी न कभी किसी झूठे केस का शिकार हुआ है। जानें अपने कानूनी अधिकार और खुद को बचाने का पूरा तरीका। पूरी कहानी पढ़ने के लिए क्लिक करें!