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कटघरे में खड़े एक व्यक्ति ने अपने हर अपराध को 'मेरा मौलिक अधिकार' कहकर जायज़ ठहराने की कोशिश की। लेकिन जज के एक फैसले ने साबित कर दिया कि संविधान आपको अधिकार ज़रूर देता है, लेकिन कानून तोड़ने का लाइसेंस नहीं। जानिए आपके अधिकारों की 'लक्ष्मण रेखा' कहाँ खींची गई है।
क्या हमारे मौलिक अधिकार (Fundamental Rights) सच में असीमित और अभेद्य हैं? आइए एक कोर्टरूम थ्रिलर के नजरिए से समझते हैं कि कैसे संविधान के अनुच्छेद 14, 19 और 21 राज्य के सख्त कानूनों के सामने अपनी सीमाएं तय करते हैं। जानिए वह कानूनी सच जो हर नागरिक को डराता भी है और जगाता भी है।
बिना सोचे-समझे किया गया एक क्लिक आपकी ज़िंदगी कैसे बदल सकता है? आर्यन की इस कहानी के ज़रिए जानिए कि 'अभिव्यक्ति की आज़ादी' की संवैधानिक सीमाएं (Public Order) क्या हैं और एक भड़काऊ पोस्ट शेयर करने के क्या गंभीर कानूनी परिणाम हो सकते हैं।
क्या सोशल मीडिया पर कुछ भी लिखने की पूर्ण आज़ादी है? जानिए कैसे आधी-अधूरी कानूनी जानकारी, 'आर्टिकल 19' का भ्रम और एक वायरल पोस्ट एक आम इंसान को जेल की सलाखों के पीछे पहुँचा सकती है। पढ़ें एक रोंगटे खड़े कर देने वाली कानूनी कहानी।
"जीएसटी पोर्टल पर फंसा लाखों का रिफंड और बैंक की रिकवरी का डर! पढ़िए रमेश की वह खौफनाक कहानी जब उसका पूरा व्यापार बंद होने की कगार पर आ गया था। जानें कैसे एक सही कानूनी सलाह और मजबूत दांव-पेच ने उसे इस 'जीएसटी चक्रव्यूह' से बाहर निकाला।"