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क्या केवल मौखिक मृत्युपूर्व घोषणा (Oral Dying Declaration) के आधार पर किसी को हत्या का दोषी ठहराया जा सकता है? 09 अक्टूबर 2023 को Patna High Court की Division Bench ने Criminal Appeal Nos. 325, 456 & 481 of 2017 में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि कमजोर साक्ष्य, संदिग्ध गवाही और पुलिस की लचर जांच के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। इस लेख में जानें कि कैसे 800 गज दूर से आवाज सुनने के दावे और कपड़ों पर कट के निशान न होने के कारण कोर्ट ने अभियुक्तों को Benefit of Doubt देते हुए बरी कर दिया। यह क्रिमिनल लॉ और एविडेंस एक्ट को समझने के लिए एक मास्टरक्लास है।
03 जनवरी 2024 को पटना हाई कोर्ट की खंडपीठ ने LPA No. 907/2023 में एक ऐतिहासिक निर्णय दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि Senior Citizen Act, 2007 के तहत गठित Tribunal के पास बेटे या बहू को संपत्ति से बेदखल (Evict) करने का कोई सीधा अधिकार नहीं है, जब तक कि मामला अधिनियम की धारा 23(1) की शर्तों को पूरा न करता हो। ट्रिब्यूनल केवल भरण-पोषण दिला सकता है, लेकिन बेदखली के लिए सिविल कोर्ट जाना होगा। इस लेख में जानें इस कानूनी सिद्धांत की पूरी व्याख्या, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और आपके कानूनी अधिकार।
भारत के 10 सबसे चर्चित और ऐतिहासिक क्राइम केसेस का तथ्यात्मक विश्लेषण, जिन्होंने न केवल देश को झकझोर दिया बल्कि भारतीय दंड संहिता (IPC), साक्ष्य अधिनियम, और न्याय प्रणाली में बड़े बदलावों की नींव रखी। जानिए नानावती से लेकर निर्भया केस तक से जुड़े अहम कानूनी सबक।
क्या एक मृत व्यक्ति की आवाज़ अदालत में गूँज सकती है? बिना चश्मदीद के कोई कातिल कैसे पकड़ा जाता है? इस कोर्टरूम इन्वेस्टिगेशन डॉक्यूमेंट्री में जानिए Indian Evidence Act (अब Bharatiya Sakshya Adhiniyam) के उन 10 ऐतिहासिक मुकदमों की कहानी, जिन्होंने भारत की अदालतों में सबूतों और सत्य की परिभाषा ही बदल दी।