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कटघरे में खड़े एक व्यक्ति ने अपने हर अपराध को 'मेरा मौलिक अधिकार' कहकर जायज़ ठहराने की कोशिश की। लेकिन जज के एक फैसले ने साबित कर दिया कि संविधान आपको अधिकार ज़रूर देता है, लेकिन कानून तोड़ने का लाइसेंस नहीं। जानिए आपके अधिकारों की 'लक्ष्मण रेखा' कहाँ खींची गई है।
क्या होता है जब एक आम और शरीफ इंसान अपने एक पल के गुस्से (Road Rage) के कारण जेल की सलाखों के पीछे पहुँच जाता है? एक क्रिमिनल लॉयर की डायरी से पढ़िए 'जेल के अंदर की पहली रात' की वह खौफनाक सच्चाई, जो आपको अपराध और उसकी भयानक कीमत के बारे में सोचने पर मजबूर कर देगी।