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क्या Writ Petition वापस लेने का मतलब Court में केस हार जाना है? Patna High Court के Civil Writ Jurisdiction Case No. 5668 of 2023 (दिनांक 26 जुलाई 2023) के विशेष आदेश के माध्यम से जानिए कि जब Hon'ble Bench किसी याचिका को "dismissed as withdrawn" के रूप में समाप्त करती है, तो उसका merits और judicial findings पर क्या असर पड़ता है। यह लेख आम नागरिकों, वकीलों और कानून के छात्रों के लिए बेहद उपयोगी है।
अदालती आदेशों में अक्सर दिखने वाले शब्द "Dismissed as Withdrawn" को लेकर आम लोगों में भारी भ्रम रहता है। जानिए याचिका वापस लेने और गुण-दोष पर खारिज होने में क्या अंतर है और ऐसे आदेश के बाद दोबारा केस करने के क्या नियम हैं।
बिहार पुलिस एवं बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस में सिपाही संवर्ग के लगभग 21,391 रिक्त पदों के लिए जारी भर्ती विज्ञापन में शैक्षणिक अर्हता और आयु सत्यापन के लिए निर्धारित 01.08.2022 की कट-ऑफ तिथि को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि शैक्षणिक सत्र 2022–23 में 12वीं उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी इस पूर्ववर्ती तिथि के कारण भर्ती से वंचित हो गए, जिससे सार्वजनिक रोजगार में समानता का अधिकार प्रभावित होता है। माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं माननीय न्यायमूर्ति पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने रिट याचिका (CWJC 11126/2023) की सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी कि भर्ती प्राधिकारी को पात्रता शर्तें और संदर्भ तिथि तय करने का पूर्ण प्रशासनिक अधिकार है। न्यायालय ने कट-ऑफ तिथि में कोई मनमानापन न पाते हुए याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया।
क्या किसी व्यक्ति की जेंडर पहचान ही उसकी जाति हो सकती है? बिहार जाति आधारित गणना 2022 में ट्रांसजेंडर समुदाय को जातियों की सूची में क्रमांक 22 पर शामिल किए जाने के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में दायर CWJC No. 6505 of 2023 (रेशमा प्रसाद बनाम बिहार सरकार) पर न्यायालय का ऐतिहासिक दृष्टिकोण सामने आया। माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि "Transgender is not a caste identity"। न्यायालय ने आत्म-निर्णय के अधिकार और सरकारी स्पष्टीकरण (पत्र संख्या 7888) का संज्ञान लेते हुए सर्वेक्षण को रद्द किए बिना समुदाय के सामाजिक-आर्थिक कल्याण के संदर्भ में याचिका को महत्वपूर्ण टिप्पणियों के साथ निस्तारित किया। जानिए इस निर्णय के सभी संवैधानिक और कानूनी पहलू।
NDPS Act के मामलों में मादक पदार्थ की बरामदगी पुलिस का सबसे बड़ा हथियार होता है। लेकिन Patna High Court ने Criminal Appeal No. 1415 of 2017 में 65 KG गांजा जब्ती के मामले में Trial Court की सजा को रद्द कर दिया। कोर्ट ने माना कि केवल जब्ती दिखाना काफी नहीं है; सैंपलिंग, सीलिंग, वीडियोग्राफी, और जब्त माल को भौतिक साक्ष्य के रूप में कोर्ट में पेश करना अनिवार्य है। इस लेख में जानिए कि कैसे मालखाना रजिस्टर की कमी, FSL में देरी और जांच अधिकारियों की प्रक्रियात्मक गलतियों ने अभियोजन के केस को ध्वस्त कर दिया।
Patna High Court ने अपने फैसले (Cr. Misc. No. 18394 of 2019) में यह स्पष्ट किया है कि डॉक्टर द्वारा इलाज में की गई हर गलती या 'Error of Judgment' आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence) नहीं होती। धारा 304-A IPC के तहत आपराधिक दायित्व तय करने के लिए लापरवाही का स्तर 'घोर' (Gross Negligence) होना चाहिए। इस ब्लॉग में हमने Supreme Court के Jacob Mathew फैसले, Bolam Test और Civil बनाम Criminal Liability के अंतर को सरल हिन्दी में समझाया है। मरीजों, डॉक्टरों और कानून के छात्रों के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विश्लेषण है।
क्या आप जानते हैं कि एक अनरजिस्टर्ड वसीयत (Unregistered Will) भी पूरी तरह मान्य हो सकती है? पटना हाईकोर्ट ने First Appeal No. 531 of 1981 में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाकर स्पष्ट किया है कि केवल पंजीकरण न होने के आधार पर प्रोबेट केस को खारिज नहीं किया जा सकता। सुप्रीम कोर्ट के नवीनतम दृष्टांतों के प्रकाश में इस ब्लॉग में जानें कि रायती/कृषि भूमि के मामले में वसीयत की सत्यता कैसे जांची जाती है और प्रोबेट की क्या अहमियत है।
क्या कोई पत्नी केवल इस आधार पर अपना 498A या दहेज उत्पीड़न का आपराधिक मुकदमा दूसरे जिले में ट्रांसफर करा सकती है क्योंकि उसने अपना शहर बदल लिया है? 03 नवम्बर 2023 को Patna High Court ने (Criminal Miscellaneous No. 6335 of 2023) मामले में फैसला सुनाते हुए इसका उत्तर 'नहीं' में दिया है। माननीय न्यायालय ने स्पष्ट किया कि Section 407 CrPC के तहत केस का ट्रांसफर न्याय और गवाहों की सुविधा के आधार पर होता है, न कि किसी एक पक्ष की व्यक्तिगत सुविधा के लिए। 498A मामलों में केस ट्रांसफर के नियम समझने के लिए पढ़ें यह पूरी कानूनी व्याख्या।
क्या केवल मौखिक मृत्युपूर्व घोषणा (Oral Dying Declaration) के आधार पर किसी को हत्या का दोषी ठहराया जा सकता है? 09 अक्टूबर 2023 को Patna High Court की Division Bench ने Criminal Appeal Nos. 325, 456 & 481 of 2017 में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि कमजोर साक्ष्य, संदिग्ध गवाही और पुलिस की लचर जांच के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। इस लेख में जानें कि कैसे 800 गज दूर से आवाज सुनने के दावे और कपड़ों पर कट के निशान न होने के कारण कोर्ट ने अभियुक्तों को Benefit of Doubt देते हुए बरी कर दिया। यह क्रिमिनल लॉ और एविडेंस एक्ट को समझने के लिए एक मास्टरक्लास है।
03 जनवरी 2024 को पटना हाई कोर्ट की खंडपीठ ने LPA No. 907/2023 में एक ऐतिहासिक निर्णय दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि Senior Citizen Act, 2007 के तहत गठित Tribunal के पास बेटे या बहू को संपत्ति से बेदखल (Evict) करने का कोई सीधा अधिकार नहीं है, जब तक कि मामला अधिनियम की धारा 23(1) की शर्तों को पूरा न करता हो। ट्रिब्यूनल केवल भरण-पोषण दिला सकता है, लेकिन बेदखली के लिए सिविल कोर्ट जाना होगा। इस लेख में जानें इस कानूनी सिद्धांत की पूरी व्याख्या, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और आपके कानूनी अधिकार।