Aakhri Gawahi – Jo Kabhi Court Tak Nahi Pahunchi .......
15 साल बाद, कोर्ट के रिकॉर्ड रूम से एक पुरानी, फटे-पुराने पन्नों वाली डायरी मिली। यह डायरी राघव सिंघानिया केस से जुड़ी है, जहाँ अदालत ने उसे सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था। लेकिन डायरी का पहला पन्ना कुछ और ही कह रहा था—एक आम अकाउंटेंट जगदीश प्रसाद ने लिखा, 'मैं सच जानता था... लेकिन डर गया।' उसके डर ने कैसे न्याय को रोक दिया और कैसे यह न बोला गया सच हमारे समाज का असली हॉरर है, पढ़िए यह रोमांचक साइकोलॉजिकल लीगल ब्लॉग। पढ़िए कैसे गवाह की ज़िम्मेदारी और नैतिक साहस न्याय के लिए अहमियत रखती है।
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