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अगर किसी सरकारी या सार्वजनिक संस्थान में नियमित नियुक्तियों की कमी हो और संविदा नियुक्तियाँ चलती रहें, तो क्या इस विषय को हाई कोर्ट में उठाया जा सकता है? पटना हाई कोर्ट के CWJC No. 22953/2019 आदेश से समझिए LNMI पटना के 73 पदों का मामला, संस्थागत हलफनामे का महत्व और संविदा बनाम नियमित नौकरी के व्यावहारिक कानूनी पहलू।
"यदि सरकारी ART Centre में जरूरी दवाइयां न मिलें, तो मरीजों के पास क्या कानूनी और प्रशासनिक विकल्प हैं? Patna High Court के महत्वपूर्ण आदेश (CWJC No. 7852/2018) के आधार पर जानिए दवाओं की निरंतर उपलब्धता और मरीजों के अधिकारों से जुड़े सभी कानूनी पहलू।"
क्या Writ Petition वापस लेने का मतलब Court में केस हार जाना है? Patna High Court के Civil Writ Jurisdiction Case No. 5668 of 2023 (दिनांक 26 जुलाई 2023) के विशेष आदेश के माध्यम से जानिए कि जब Hon'ble Bench किसी याचिका को "dismissed as withdrawn" के रूप में समाप्त करती है, तो उसका merits और judicial findings पर क्या असर पड़ता है। यह लेख आम नागरिकों, वकीलों और कानून के छात्रों के लिए बेहद उपयोगी है।
क्या सड़क परियोजना पूरी होने पर कोर्ट केस खत्म हो जाता है? पटना हाईकोर्ट के Civil Writ Case No. 2928/2022 के जरिए सरल हिंदी में समझें कि 'Writ Petition Closed' का वास्तविक कानूनी अर्थ क्या है और इसका याचिकाकर्ता पर क्या प्रभाव पड़ता है।
अदालती आदेशों में अक्सर दिखने वाले शब्द "Dismissed as Withdrawn" को लेकर आम लोगों में भारी भ्रम रहता है। जानिए याचिका वापस लेने और गुण-दोष पर खारिज होने में क्या अंतर है और ऐसे आदेश के बाद दोबारा केस करने के क्या नियम हैं।
बिहार पुलिस एवं बिहार विशेष सशस्त्र पुलिस में सिपाही संवर्ग के लगभग 21,391 रिक्त पदों के लिए जारी भर्ती विज्ञापन में शैक्षणिक अर्हता और आयु सत्यापन के लिए निर्धारित 01.08.2022 की कट-ऑफ तिथि को पटना उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी। याचिकाकर्ता का तर्क था कि शैक्षणिक सत्र 2022–23 में 12वीं उत्तीर्ण करने वाले अभ्यर्थी इस पूर्ववर्ती तिथि के कारण भर्ती से वंचित हो गए, जिससे सार्वजनिक रोजगार में समानता का अधिकार प्रभावित होता है। माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं माननीय न्यायमूर्ति पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने रिट याचिका (CWJC 11126/2023) की सुनवाई करते हुए व्यवस्था दी कि भर्ती प्राधिकारी को पात्रता शर्तें और संदर्भ तिथि तय करने का पूर्ण प्रशासनिक अधिकार है। न्यायालय ने कट-ऑफ तिथि में कोई मनमानापन न पाते हुए याचिका को प्रारंभिक स्तर पर ही खारिज कर दिया।
क्या किसी वैधानिक आयोग के अध्यक्ष की नियुक्ति के लिए सार्वजनिक विज्ञापन अनिवार्य है? क्या किसी राजनेता का चयन स्वतः अवैध माना जा सकता है? पटना उच्च न्यायालय ने Civil Writ Jurisdiction Case No. 16611 of 2021 (Veterans Forum for Transparency v. State of Bihar) में बिहार राज्य खाद्य आयोग के अध्यक्ष पद पर प्रत्यर्थी संख्या 8 की नियुक्ति को चुनौती देने वाली अधिकार-पृच्छा (Quo Warranto) याचिका पर ऐतिहासिक फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश और न्यायमूर्ति पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 की धारा 16(3), चयन समिति की कार्यप्रणाली और सर्वोच्च न्यायालय के नमिता शर्मा व तेची तागी तारा फैसलों का विश्लेषण करते हुए जनहित याचिका को खारिज कर दिया। प्रशासनिक कानून और सार्वजनिक नियुक्तियों की विधिक बारीकियों को समझने के लिए पढ़ें यह संपूर्ण केस विश्लेषण।
क्या किसी व्यक्ति की जेंडर पहचान ही उसकी जाति हो सकती है? बिहार जाति आधारित गणना 2022 में ट्रांसजेंडर समुदाय को जातियों की सूची में क्रमांक 22 पर शामिल किए जाने के खिलाफ पटना उच्च न्यायालय में दायर CWJC No. 6505 of 2023 (रेशमा प्रसाद बनाम बिहार सरकार) पर न्यायालय का ऐतिहासिक दृष्टिकोण सामने आया। माननीय मुख्य न्यायाधीश एवं न्यायमूर्ति पार्थ सार्थी की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि "Transgender is not a caste identity"। न्यायालय ने आत्म-निर्णय के अधिकार और सरकारी स्पष्टीकरण (पत्र संख्या 7888) का संज्ञान लेते हुए सर्वेक्षण को रद्द किए बिना समुदाय के सामाजिक-आर्थिक कल्याण के संदर्भ में याचिका को महत्वपूर्ण टिप्पणियों के साथ निस्तारित किया। जानिए इस निर्णय के सभी संवैधानिक और कानूनी पहलू।
Patna High Court ने अपने फैसले (Cr. Misc. No. 18394 of 2019) में यह स्पष्ट किया है कि डॉक्टर द्वारा इलाज में की गई हर गलती या 'Error of Judgment' आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence) नहीं होती। धारा 304-A IPC के तहत आपराधिक दायित्व तय करने के लिए लापरवाही का स्तर 'घोर' (Gross Negligence) होना चाहिए। इस ब्लॉग में हमने Supreme Court के Jacob Mathew फैसले, Bolam Test और Civil बनाम Criminal Liability के अंतर को सरल हिन्दी में समझाया है। मरीजों, डॉक्टरों और कानून के छात्रों के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विश्लेषण है।
पटना हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया है कि यदि अपीलीय डिक्री (Appellate Decree) में विवादित संपत्ति का विवरण नहीं है, तो निष्पादन न्यायालय (Execution Court) निष्पादन रोकने के बजाय मूल ट्रायल कोर्ट की डिक्री से संपत्ति का विवरण प्राप्त कर सकता है।
क्या केवल मौखिक मृत्युपूर्व घोषणा (Oral Dying Declaration) के आधार पर किसी को हत्या का दोषी ठहराया जा सकता है? 09 अक्टूबर 2023 को Patna High Court की Division Bench ने Criminal Appeal Nos. 325, 456 & 481 of 2017 में एक महत्वपूर्ण निर्णय देते हुए स्पष्ट किया कि कमजोर साक्ष्य, संदिग्ध गवाही और पुलिस की लचर जांच के आधार पर सजा नहीं दी जा सकती। इस लेख में जानें कि कैसे 800 गज दूर से आवाज सुनने के दावे और कपड़ों पर कट के निशान न होने के कारण कोर्ट ने अभियुक्तों को Benefit of Doubt देते हुए बरी कर दिया। यह क्रिमिनल लॉ और एविडेंस एक्ट को समझने के लिए एक मास्टरक्लास है।
03 जनवरी 2024 को पटना हाई कोर्ट की खंडपीठ ने LPA No. 907/2023 में एक ऐतिहासिक निर्णय दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि Senior Citizen Act, 2007 के तहत गठित Tribunal के पास बेटे या बहू को संपत्ति से बेदखल (Evict) करने का कोई सीधा अधिकार नहीं है, जब तक कि मामला अधिनियम की धारा 23(1) की शर्तों को पूरा न करता हो। ट्रिब्यूनल केवल भरण-पोषण दिला सकता है, लेकिन बेदखली के लिए सिविल कोर्ट जाना होगा। इस लेख में जानें इस कानूनी सिद्धांत की पूरी व्याख्या, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और आपके कानूनी अधिकार।
Facing legal challenges in Bihar? Whether dealing with complex property disputes, criminal defense, or intricate GST and taxation compliance, finding the right advocate is crucial. Learn the essential qualities to look for when securing top-tier legal representation at the Patna High Court and Civil Court.
Cheque Bounce Rule in India | Fasa Hua Paisa Kaise Nikale? - My Law Suvidha