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03 जनवरी 2024 को पटना हाई कोर्ट की खंडपीठ ने LPA No. 907/2023 में एक ऐतिहासिक निर्णय दिया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि Senior Citizen Act, 2007 के तहत गठित Tribunal के पास बेटे या बहू को संपत्ति से बेदखल (Evict) करने का कोई सीधा अधिकार नहीं है, जब तक कि मामला अधिनियम की धारा 23(1) की शर्तों को पूरा न करता हो। ट्रिब्यूनल केवल भरण-पोषण दिला सकता है, लेकिन बेदखली के लिए सिविल कोर्ट जाना होगा। इस लेख में जानें इस कानूनी सिद्धांत की पूरी व्याख्या, सुप्रीम कोर्ट के फैसले और आपके कानूनी अधिकार।
एक सूनी अलमारी, धूल भरी फाइल, और एक माँ का आखिरी अंगूठे का निशान... जिसने भाई-बहनों के बीच अटूट विश्वास को शक की दीवार में बदल दिया. क्या यह संपत्ति का लालच था या माँ का कोई गुप्त फैसला? पढ़ें, एक ऐसा 'इमोशनल फैमिली लीगल ड्रामा' जो आपको अपने परिवार और उनके कानूनी दस्तावेज़ों के बारे में सोचने पर मजबूर कर देगा.