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20 साल पुरानी एक धूल भरी फाइल, एक अनसुलझा केस और एक खामोश शहर। अदालत ने जिसे एक 'हादसा' मानकर फाइल बंद कर दी, क्या उसका सच कभी सामने आ पाएगा? पढ़िए एक ऐसा साइकोलॉजिकल थ्रिलर जो साबित करता है कि कभी-कभी मुजरिम कोई एक इंसान नहीं, बल्कि समाज का डर होता है।
एक रिटायर्ड जज की डायरी से: जानिए कैसे एक साधारण से मिडिल-क्लास अकाउंटेंट की ज़िंदगी उसके दोस्त द्वारा कराए गए एक 'फॉर्मेलिटी' वाले सिग्नेचर की वजह से बर्बाद हो गई। बिना पढ़े साइन करने, ब्लैंक चेक देने और गारंटर बनने का खौफनाक सच जो आपको अंदर तक डरा देगा।