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Patna High Court ने अपने फैसले (Cr. Misc. No. 18394 of 2019) में यह स्पष्ट किया है कि डॉक्टर द्वारा इलाज में की गई हर गलती या 'Error of Judgment' आपराधिक लापरवाही (Criminal Negligence) नहीं होती। धारा 304-A IPC के तहत आपराधिक दायित्व तय करने के लिए लापरवाही का स्तर 'घोर' (Gross Negligence) होना चाहिए। इस ब्लॉग में हमने Supreme Court के Jacob Mathew फैसले, Bolam Test और Civil बनाम Criminal Liability के अंतर को सरल हिन्दी में समझाया है। मरीजों, डॉक्टरों और कानून के छात्रों के लिए यह एक अत्यंत महत्वपूर्ण विश्लेषण है।
"उसने कोई जुर्म नहीं किया था... फिर भी उसका नाम FIR में था।" सुबह के 6 बजे हैं। दरवाज़े पर पुलिस खड़ी है और एक बेगुनाह आदमी के खिलाफ एक गंभीर, लेकिन झूठी FIR दर्ज हो चुकी है। समाज की नज़रों में वो पल भर में मुज़रिम बन चुका है, जबकि अदालत का फैसला आना अभी बाकी है। क्या होगा जब एक आम और ईमानदार इंसान अचानक कानून के इस खौफनाक चक्रव्यूह में फँस जाएगा? क्या पुलिस उसे तुरंत गिरफ्तार कर लेगी? क्या यह झूठी FIR कभी कैंसिल हो पाएगी? पढ़िए एक रिटायर्ड हाई कोर्ट जज की कलम से लिखी गई यह इमोशनल और सस्पेंस से भरी 'लीगल थ्रिलर' कहानी; जिसमें छिपा है हर उस बेगुनाह के लिए एक पूरा 'लीगल सर्वाइवल गाइड', जो कभी न कभी किसी झूठे केस का शिकार हुआ है। जानें अपने कानूनी अधिकार और खुद को बचाने का पूरा तरीका। पूरी कहानी पढ़ने के लिए क्लिक करें!
"अक्सर लोग गुस्से में पुलिस केस कर देते हैं और बाद में पछताते हैं। लेकिन क्या कानूनन FIR वापस ली जा सकती है? शर्मा और वर्मा परिवार की इस कहानी के ज़रिये समझिए 'समझौता योग्य' (Compoundable) और 'गैर-समझौता योग्य' (Non-Compoundable) अपराधों के बीच का फर्क, और जानें कि एक बार FIR दर्ज होने के बाद पुलिस और कोर्ट की प्रक्रिया कैसे काम करती है।"