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एक गरीब पिता और उसकी बेटी की यह कहानी सिर्फ एक लीगल थ्रिलर नहीं है, बल्कि हमारे समाज की खामोशी पर एक गहरा सवाल है। यह उस अनदेखे दर्द और कोर्टरूम के उस संघर्ष की दास्तान है, जहाँ न्याय पाना आसां नहीं होता। पढ़िए कैसे एक टूटा हुआ परिवार अँधेरे से निकल कर न्याय की जंग लड़ता है।
सात साल का लंबा संघर्ष, रसूखदारों की धमकियां और एक पिता की अटूट हिम्मत। पढ़िए 'कोर्टरूम का आखिरी दिन', एक ऐसा सस्पेंस ड्रामा जो भारतीय न्याय प्रणाली (Justice System) और 'रूल ऑफ़ लॉ' में आपके विश्वास को फिर से जगा देगा। क्या सच और न्याय की जीत होगी?