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जब एक मासूम बेटी भयानक अपराध का शिकार होती है, तो एक सीधे-सादे पिता का दुनिया से विश्वास उठ जाता है। न्याय मिलने में हो रही देरी उसे बदले की आग में धकेलती है। लेकिन क्या एक और अपराध किसी बेटी को वापस ला सकता है? पढ़िए एक पिता के दर्द, गुस्से और न्याय के बीच की सबसे मुश्किल मनोवैज्ञानिक लड़ाई की एक रोंगटे खड़े कर देने वाली कहानी।
एक सेकंड का गुस्सा और एक ट्रिगर... जानिए कैसे एक गंभीर अपराध सिर्फ एक व्यक्ति की जान नहीं लेता, बल्कि पीड़ित और आरोपी दोनों के परिवारों की पीढ़ियों को बर्बाद कर देता है। पुलिस इन्वेस्टिगेशन के खौफ से लेकर कोर्ट रूम की तारीखों और जेल की डार्क सच्चाई तक का एक इमोशनल और लीगल सफर।